श्रध्दा-संस्कृती
February 6, 2026 09:11 AM
पंडित होय के आसन मारे पंडित होय के आसन मारे, लंबी माला जपत है। अंतर तेरे कपट करतनी, सो भी साहब लिखता है ।। - डॉ.
January 31, 2026 08:43 AM
हीरा वहाँ न खोलिये हीरा वहाँ न खोलिये, जहाँ खोटी है हाट। कस करि बाँधो गाँठरी, ऊठ कर चालो बाट।। -
All Rights Reserved View Non-AMP Version