June 4, 2026 02:56 PM
समर्थ रामदास
राम आकाशीं पाताळी। राम नांदे भूमंडळी। राम योगियांचे मेळी। सर्व काळी शोभतो॥ राम नित्य निरंतरी। राम सबाह्य
June 4, 2026 02:56 PM
राम आकाशीं पाताळी। राम नांदे भूमंडळी। राम योगियांचे मेळी। सर्व काळी शोभतो॥ राम नित्य निरंतरी। राम सबाह्य
June 2, 2026 03:09 PM
देहचतुष्टयाची रचोनी होळी। ज्ञानाग्नि घालुनी समूळ जाळी ॥१॥ अझुनी कां उगलाची। बोंब पडो दे
June 1, 2026 05:38 PM
पृथ्वी ध्यासी तरी पृथ्वीचि होसी । केशव न होसी अरे मना ॥ आप ध्यासी तरी आपचि होसी । केशव न होसी
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